कोई नही था

खिड़की से देखा तो रस्ते पे कोई नही था।
खिड़की से देखा तो रस्ते पे कोई नही था।
वाह वाह
फिर रस्ते पे जाके देखा तो खिड़की में कोई नही था।
शायरी खत्म।