ज़िन्दगी रूठी है

कुछ लोगो को लगता है उनकी चालाकियां मुझे समझ नहीं आती,.
मैं बड़ी ख़ामोशी से देखता हूँ उनको अपनी नज़रों से गिरते हुए।


जागना भी कबूल हैं तेरी यादों में रात भर ,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहा।


ज़िन्दगी रूठी है किसी बच्चे की तरह ,
कभी कुछ मांगती है … कभी कुछ मांगती है ।