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ख़ुशी क्या है

जो आप चाहते हैं उसे पाना सफलता है और
जो आपके पास है उसे चाहना ही प्रसन्नता है।


प्रेम वो प्रतिबन्ध है जिसमें दुसरे की ख़ुशी
आपकी अपनी ख़ुशी के लिए आवश्यक है।


ख़ुशी कोई पहले से ही बनी बनायीं वस्तु नहीं है,
ये सिर्फ आपके अपने काम से ही आती है।


ख़ुशी क्या है,
अगर आप ये खोजते रहेंगे तो कभी भी खुश नहीं रहेंगे और जीवन क्या है,
अगर आप ये खोजते रहेंगे तो कभी भी जी नहीं पाएंगे।

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